Antarman ki Roshni
Antarman ki RoshniAshutosh Mishra
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अन्तर्मन की रोशनी” पिछले तीन चार वर्षों में लिखी गई मेरी कविताओं में से कुछ चुनिंदा कविताओ का एक संग्रह है। सच कहूँ तो यह कविताएँ स्वयंभू है और मेरा लिखrना उन्हें काग़ज़ पर या स्मार्ट फोन पर उकेरना मात्र है। ये कविताएँ अन्तर्मन के झरोखों से झरती हुई रोशनी हैं जिन्होंने झरोखों के आकार प्रकार के हिसाब से काग़ज़ पर अलग अलग शक़्ल अख़्तियार की है। कोई अध्यात्म के झरोखे से है तो कोई मन के अन्तर्द्वन्द्व के झरोखे से निकली है। कही रिश्तों के झरोखे से झरी है रोशनी, तो कही समाज की बुराइयों अच्छाइयों पर प्रकाश है। ये कविताएँ कहीं न कहीं आपके अन्तर्मन को भी अवश्य छूऐंगी क्योंकि हम में से हरेक के अन्दर एक सी ही रोशनी है। वह दि व्य जिसने इन्हें रचा है वह आपके रूप में इन रचनाओं का साक्षी भी होगा।